Sunday, July 12, 2009

१०- जुलाई, ईदगाह

आज की चौपाल में खजूर में अटका का पाठ होना था। हालांकि भूमिकाओं के निर्णय का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है पर जिन लोगों को पहली दृष्टि में इसमें काम करने का निमंत्रण दिया गया था उसमें से सब उपस्थित नहीं थे। इंतज़ार करते हुए पहले प्रकाश सोनी ने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह का पाठ किया।

नाटक के निर्देशक डॉ.उपाध्याय भारत गए हुए हैं। उपस्थित लोगों में आज थे- सबीहा, बिमान दा, प्रकाश, मीर कौशिक, इरफ़ान, मैं और प्रवीण सक्सेना। ईदगाह के बाद चाय हुई और उसके बाद खजूर में अटका का दूसरा भाग पढ़ा गया। आज मुझे कुछ काम था घर पर इसलिए चौपाल खतम होने से कुछ पहले ही उठ गई। आशा है अगली चौपाल में उपस्थित इससे बेहतर रहेगी।

Saturday, July 4, 2009

३ जुलाई, आगे की तैयारियाँ


रज्जो की शादी अच्छी रही। कुछ स्थानीय कलाकारों के साथ मिलकर गुड्डी मारुति को प्रस्तुत करने का प्रतिबिंब का यह प्रयत्न कई मामलों में सफल कहा जा सकता है। शेख राशिद आडिटोरियम, जो यहाँ के जाने माने थियेटरों में से एक है, और लगभग 1000 लोगों के बैठने की क्षमता वाला है, में कोई प्रस्तुति रखना और दर्शकों को जुटा पाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। हालाँकि यह एक प्रायोजित शो था तो प्रायोजकों का हस्तक्षेप सारे नाटक पर छाया रहा। नाटक 40 मिनट देर से शुरू हुआ, 15 मिनट तक प्रायोजकों की फ़िल्म चलती रही और प्रायोजक के भाषण के लिए सूत्रधार का अंतिम दृश्य कट गया जिससे पता ही न चला कि नाटक कब खत्म हुआ। दर्शक दीर्घा की सीढ़ियों पर बच्चों की अच्छी मटरगश्ती रही। फिर भी लोगों ने नाटक का मज़ा उठाया, हंसी के गुबार फूटे और माहौल मज़े का रहा।

3 जुलाई की चौपाल में हम इन्हीं बातों का मज़ा लेते रहे। गर्मी की छुट्टियाँ हैं, अनेक परिवार भारत या पाकिस्तान चले गए हैं सो उपस्थिति कम थी। चौपाल 10:30 पर शुरू हो जाती है पर 11:30 तक प्रकाश, सबीहा, मेरे और प्रवीण जी के सिवा कोई नहीं आया था। हम चारों रज्जो की शादी और पिछले नाटकों की समीक्षा आलोचना करते रहे। फिर रिज़वी साहब, बिमान दा, इरफ़ान, मीर और अश्विन भी आ गए। बिमान दा ने कहा कि वे अगस्त में हमेशा के लिए भारत जा रहे हैं। सब उदास से थे। सबको आशा है कि मंदी को दौर खतम होते ही 2-4 महीनों में वे वापस लौटेंगे। बातों बातों में समय कब निकल गया पता नहीं चला। मौसम गर्म हो चला है। कोई चाय पीने के मूड में नहीं था। आज चौपाल भी लंबी नहीं चली। 12:30 बजे सब अपने अपने घर को रवाना हो लिए।

हाँ आगे की तैयारियों में थियेटरवाला की ओर से किए जाने वाले 'खजूर में अटका' के लिए एमिरेट्स स्कूल के थियेटर में बुकिंग मिली है 2 अक्तूबर की। और रिजवी साहब प्रतिबिंब की ओर से मनोज बाजपेयी को लेकर अगस्त के दूसरे सप्ताह में 'भगतसिंह की वापसी' के मंचन की तैयारियों में लग गए हैं।

Sunday, June 28, 2009

२६ जून, ऋतु गर्मी की आई!


पिछले प्रदर्शन के बाद थियेटरवाला द्वारा खजूर में अटका की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। दूसरी और प्रतिबिंब का नाटक रज्जो की शादी अंतिम दौर में है। इसका प्रदर्शन २ जुलाई को होना तय हुआ है। आज चौपाल में विशेष कार्यक्रम खजूर में अटका की रीडिंग का था। प्रकाश सोनी, कौशिक साहा, डॉ. उपाध्याय और अली भाई सबसे पहले पहुँचे। धीरे धीरे कल्याण, मेनका, सबीहा, संग्राम और नेहा भी पहुँच गए।

गर्मी का मौसम शुरू होने लगा है और एक माह बाद रमज़ान भी शुरू हो जाएँगे। इस दौरान प्रदर्शन बहुत ही कम होते हैं या लगभग नहीं होते। रमज़ान में तो प्रदर्शन बिलकुल ही बंद रहते हैं। रिहर्सल भी आमतौर पर नहीं होते हैं, स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों के कारण बहुत से लोग छुट्टी पर भारत या दूसरे देशों को चले जाते हैं। चौपाल में उपस्थिति कम हो जाती है। ए.सी. की सर्दी के बावजूद चाय पीने का मन बहुत कम लोगों का होता है। इसलिए चाय कुछ कम ही बनाई थी पर कम पड़ गई। कल्याण को चाय काफ़ी पसंद है पर आज उन्हें ही सब्र करना पड़ा।

अगले माह शायद खजूर में अटका की भूमिकाओं को निर्धारित कर दिया जाएगा। रज्जो... का रिहर्सल जारी है और उसका विशेष आकर्षण यह है कि इसमें मुख्य भूमिका फ़िल्म और टीवी कलाकार गुड्डी मारुति निभा रही हैं। आज ऊपर के चित्र में कल्याण और डॉ, साहब की फ़ोटो नहीं है। दाहिनी ओर के चित्र में रज्जो की शादी के कलाकार बाएँ से आदिल, मोहन जी, रिज़वी साहब, गुड्डी मारुति, मुस्तफ़ा और फ़ीरोज़।

Saturday, June 20, 2009

२० जून, बीते कल की समीक्षा आने वाले कल की तैयारी


इन टु आर्ट्स के सहयोग से थियेटरवाला की प्रस्तुति हम तुम और गैंडा फूल का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। दर्शकों की उपस्थिति भी अच्छी रही पर संतोष और अच्छाई की कोई सीमा नहीं है। बेहतर से भी बेहतर जाना है तो किए गए काम की निरंतर समीक्षा ज़रूरी है। आज ज्यादातर बातें इसी विषय में हुईं कि जो कुछ हुआ उसे कैसे बेहतर किया जा सकता था। आने वाले दिनों में खजूर में अटका की तैयारी चल रही है और उसके पहले रिज़वी साहब प्रतिबिंब के बैनर तले रज्जो की शादी कर रहे हैं। ये दोनों ही नाटक हास्य व्यंग्य से भरपूर कामदी हैं।

आज की चौपाल का प्रारंभ हम तुम और गैंडा फूल की समीक्षा से हुआ। इसके बाद खजूर में अटका के कुछ दृश्य पढ़े गए। चाय के बाद प्रतिबिम्ब के बैनर के तले होने वाले नए नाटक रज्जो की शादी का रिहर्सल हुआ।

आज उपस्थिल लोगों में थे- डॉ. शैलेष उपाध्याय, प्रकाश सोनी, कौशिक साहा, मेनका, कविता, अश्विन, कल्याण, रिज़वी साहब, सबीहा और मुस्तफ़ा। कुछ नए मेहमान भी थे- नया आमिर, आदिल, फिरोज, मोहन जी और सपना। रिहर्सल एक डेढ़ बजे तक चला। जो लोग नाटक में नहीं थे वे समय से उठकर चले गए।

Saturday, June 13, 2009

१२ जून, कम उपस्थिति ज्यादा बातें।


यह सप्ताह हम तुम और गैंडा फूल के प्रदर्शन का है। अधिकतर रिहर्सल दुबई में ही चल रहे हैं। क्यों कि कलाकार दुबई के हैं। कुछ लोग भारत गए हैं या अन्य किसी देश। इस सबके चलते इस बार चौपाल में उपस्थित कम रही। बहुत से विषयों पर चर्चा हुई जिसमें सबसे पहले हबीब तनवीर तथा सड़क दुर्घटना में दिवंगत ओमप्रकाश आदित्य, नीरज पुरी और लाडसिंह गुर्जर के श्रद्धांजलि दी गई। फ़िल्म सीरियलो, नाटकों तथा फिल्मों की आधुनिक शैली व उनके बदलते रूप पर बातचीत हुई। पुराना मंच बनाम नया मंच पर लंबी बहस भी हुई।

कार्यक्रम के अनुसार आज चरणदास चोर का पाठ होना था पर किसी का वैसा मूड बना नहीं। आज उपस्थित लोगों में थे- प्रकाश, दिलीप परांजपे, मेनका, कौशिक, मैं और प्रवीण सक्सेना। एक नए मेहमान भी थे मुस्तफ़ा। कौशिक देर से आए थे। वे हम तुम की प्रकाश व्यवस्था और संगीत को लेकर प्रकाश से बात करते रहे। चौपाल थोड़ा देर से शुरू हुई थी। १ बजे खतम हुई। लंदन से तेजेन्द्र शर्मा और ज़किया ज़ुबैरी ने थियेटर वाला के लिए कुछ धनराशि भेजी थी वह आज उन्हें दे दी गई। इसका उपयोग अगले प्रदर्शन में हो सकेगा।